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Suicide Poems in Hindi : आत्महत्या के विरुद्ध कविताएं

by Suman Gupta

Suicidal thoughts might come to a person’s mind when certain stress or pressure disturbs them.The increasing number of 2020 suicide cases has compelled us think why people are doing so. Here we present you some Suicide Poems in Hindi to let you know why suicide is wrong and what thoughts may help a person to overcome it. Read our Suicide Poems in Hindi and also tell us about your views on increasing number of 2020 suicide cases.

आत्महत्या के विचार किसी व्यक्ति के दिमाग में आ सकते हैं जब कुछ तनाव या दबाव उन्हें परेशान करता है। 2020 की आत्महत्या के मामलों की बढ़ती संख्या ने हमें सोचने पर मजबूर कर दिया है कि लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं। यहाँ हम आपको कुछ आत्महत्या कविताएँ हिंदी में प्रस्तुत करते हैं जिससे आपको पता चल सके कि आत्महत्या क्यों गलत है और किन विचारों से व्यक्ति को उबरने में मदद मिल सकती है। हमारी आत्महत्या कविताएँ हिंदी में पढ़ें और 2020 आत्महत्या के मामलों की बढ़ती संख्या के बारे में अपने विचारों के बारे में भी बताएँ।

अनमोल जीवन
Suicide poem in hindi

ज़िन्दगी सस्ती होती जा रही है,

हर तरफ खुदकुशी की खबरे छपती जा रही है !

आखिर क्यों हो रहा है ऐसा?

क्या ज़िन्दगी के मायने कम होती जा रही है !

मत रो तू आज के गम के लिए, समय सबका बदलता है !

जीवन अनमोल है इसे हर हाल में तुझे जीते रहना है !

पहचान जरा तू खुद को, जरा करीब से देख तू खुदको,

जीने की हुनर सीख तू उस से, देखने को आखें नहीं है जिसके !

सवारने में तुझे बीता दी जिसने सारी उम्र,

तू सोच एकबार तुझे कोख से निकालने वाली की तड़प !

उड़ जा तू परिंदे की तरह,

छोटी नहीं है ये दुनिया,

निकल जा तू उस गम की दुनिया से दूर!

कुछ देर बैठ आराम तुझे अब करना है,

हाँ पर फिरसे तुझे जगना है, एक नए रास्ते पे अब तुझे चलना है,

जीवन अनमोल है इसे हर हाल में में तुझे जीना है !

आत्मरक्षा

मत सोचना कभी तू करने की आत्महत्या,

ज़िन्दगी कभी हसकर, कभी रोकर ही बितानी हैँ,

जीते जीते फिर एकदिन खुलकर मौत को गले लगानी हैँ !

माना डर हैँ, भय हैँ, हैँ बेचैनी भी,

पर उम्मीद अभी भी जारी हैँ,

हार गया तू ज़िन्दगी से तो क्या,

मुस्किले तेरी बड़ी हैँ तो क्या,

दुखो के इस समंदर से तुझे खुदको पार लगाना हैँ,

कभी रोकर कभी लड़कर तुझे खुदसे ही खुदको समझाना हैँ!

क्या पता कल हो जाए सवेरा,

दूर हो जाए इस पल का ये अंधेरा,

गिराले तू कुछ दर्द के आँसुओ को,

ज़िन्दगी कभी हसकर, कभी रोकर ही बितानी हैँ,

जीते जीते फिर एकदिन खुलकर मौत को गले लगानी हैँ !

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